जहां दिखा ज़्यादा ज़्यादा
वहीं लुढ़क गया प्यादा
भूल गया हर वादा
नहीं रहा नेक इरादा
पर ध्यान रहे
कहीं ज़्यादा ज़्यादा के चक्कर में
हो ना जाये पूरे से आधा
और फिर कहना पड़े हारकर
क्यों किया ज़्यादा ज़्यादा
क्यों रहे हर समय छीनने में ही
क्यों न किया बांटने का इरादा
क्यों ना जिया जीवन सादा
क्यों किया ज़्यादा ज़्यादा
क्यों भूल गए हर वादा
कि अब बचा ही नहीं आधा
काश जिया होता जीवन सादा!!
काश जिया होता जीवन सादा !!!
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