Saturday, 30 June 2018

ज़रूरी है by Vikas Relhan Vk

*ज़रूरी है.....*
*मेरा सपने देखना*
क्योंकि मेरे सपनों के साथ जुड़े हैं किसी और के सपने भी
*मेरा परिश्रमी होना*
क्योंकि मेरे परिश्रम के साथ जुड़ी है किसी और की मेहनत भी
*मेरा ऊर्जावान होना*
क्योंकि मेरे सम्बल के साथ जुड़ा है किसी और का साथ भी
*मेरा सकारात्मक होना*
क्योंकि साथ मे जुड़ी है किसी और की उम्मीद भी
*मेरा ख़्वाब संजोना*
क्योंकि मेरे ख्वाबों पर ही बसता है किसी और का आशियाना भी
*मेरा तेज़ दौड़ना*
क्योंकि साथ में दौड़ रहे हैं किसी और के कदम भी
*मेरा जोश में होश सम्भालना* क्योंकि साथ में है किसी और की समझदारी भी
*ज़रूरी है मेरा आसमानों को छूना*
क्योंकि छूना चाहते हैं किसी और के हाथ भी
*ज़रूरी है मेरा उड़ानों को भरना*
क्योंकि लगे हैं उसमें किसी और के पंख भी
क्योंकि *मेरे सपने*
अब सिर्फ मेरे नहीं , हैं *किसी और* के सपने भी ।
और वो *"किसी और"*
कोई और नहीं
*है मेरा ख़ुद का ख़्वाब जो अब हक़ीक़त है ।।।*
*Vikas Relhan Vk*

Wednesday, 27 June 2018

हवा...(poetry) by Vikas Relhan Vk

एक दीवार सी है हवा की
बस तेरे मेरे दरमयान
वो हवा जो रोज़ बताती है मुझे तेरे बारे में
जो रोज़ बयाँ करती तेरे दिल का हाल
और पूछती है मुझसे यूँ आकर
क्या तुम भी कुछ ऐसे ही हो क्या ?
हर रोज़ लाती है तुमसे तुम्हारी ही खुशबू चुराकर,,और महका जाती है मेरी साँसों के बगीचे को
हर रोज़ वो हवा कुछ नया लेकर आती है तुमसे
और थमा जाती है मेरे हाथों में
और लाकर मुझ पर औढ़ा देती है उन पलों की वो चादर,,जिन पलों में तुम सिर्फ मुझे ही याद करती हो ।।।
🕐🕠

Saturday, 23 June 2018

यही जीवन है by Vikas Relhan Vk

सबकुछ पिघलता रहता है ,
बुराई,छल,कपट,द्वेष,ईर्ष्या,क्रोध,अहंकार
और बहता रहता है
इस मन के कुरूप ज्वालामुखी से
झूठ का लावा बनकर,
और जब ये लावा पूरी तरह से फैल जाता है
मानवीयता और इंसानियत की धरती पर और
उसके अंग प्रत्यंग को जलाना आरम्भ कर देता है,
तब आसमान से फव्वारा छूटता है पश्चाताप का,
नदियाँ बहती हैं प्रार्थनाओं की,
समन्दर बनते हैं प्रायश्चित के,
और कर देते हैं ठंडा उस लावे को
और निकलता है उसमें से
ईमान,वफ़ादारी,प्यार,दोस्ती,
रिश्ते,अच्छाई,नेकी, समर्पण का सोना,
मानव के साथ साथ इस पूरी सृष्टि को
एक नई चमक देने के लिये
ये चक्र यूँ ही चलता रहता है ,
कभी लावा जल्दी पिघल जाता है
तो कभी बारिश जल्दी हो जाती है
पर होता रहता यही,यहीं सबकुछ है,
यही जीवन है ।।।

Thursday, 21 June 2018

रूह-ए-इश्क़ (part- 3)Vikas Relhan Vk

इश्क़ चला सुकून में
रूह गोद में लिटाये
इश्क़ की जो आंख लगी
रूह प्यार से सहलाये
बलिहारी जाये , निहारी जाये

है रूह सावन की तो बसंत इश्क़ है
रूह है अनंत अनंत इश्क़ है
बारिशें रूह की ठंडी हवा इश्क़ है
हया रूह में तो अदा इश्क़ है
शिकन जो रूह के माथे तड़पन में इश्क़ है
है रूह के मन की ,तन की ,धड़कन में इश्क़ है
हाथ मे हर पल रूह के है हाथ इश्क़ का
हर दुख में हर सुख में है रूह को साथ इश्क़ का
है इश्क़ रूह के लिए हर युग मे हर जनम में
इश्क़ है रूह संग हर वादे हर कसम में
इस धरती से उस अम्बर तक है रूह इश्क़ की
ख़ुशबू है फैली हर दिल मे इनके मुश्क की
ये प्रेम ग्रंथ है अनोखा रूह और इश्क़ का
हर सांस में बढ़ता जाए बंधन ये फ़रिश्त का
इश्क़ है sssss
इश्क़ है sssss
इश्क़ है sssss

रे मन !!! By Vikas Relhan Vk

रे मन !
क्यूँ भागे तू ???
अपने ही ख्वाबों के पीछे
क्यूँ हर समय अपनी ही नींद को सींचे
क्यूँ नहीं तू अपने ही बस में
क्या दौड़ता है आखिर तेरी नस नस में
क्यूँ न समझे तू कि सपना है आख़िर बर्फ़ का टुकड़ा
जिसकी हक़ीक़त पिघलना है , जमे रहना नहीं
क्यूँ न समझे कि ख़्वाब हैं आख़िर बुलबुला पानी का
जो फूट जाए अगले ही पल बिना किसी वजूद के
अगर ख़्वाब और सपने देखने ही हैं तो त्याग दे चैन की नींद और आराम का सुख
क्योंकि ख़्वाब और सपने वो नहीं जो सोकर देखे जाते हैं
ख़्वाब और सपने तो वो होते हैं जो सोने ही नहीं देते
जीना है तो किसी अपने के लिए जी,अपनों के लिए जी
अपने लिए जीना तो स्वार्थ है,और है मतलब परस्ती
और किसी अपने के लिए जीना ही है प्रेम,समर्पण, विश्वास और उम्मीद
और यही प्रेम,यही समर्पण,यही विश्वास और यही उम्मीद पहुंचाती है किसी भी ख़्वाब और सपने को हक़ीक़त तक
रे मन !!!
भाग !!!!!!
अपने सपनों के लिये नहीं, अपने अपनों के लिये !!!

Tuesday, 19 June 2018

रूह-ए-इश्क़ (part-2) by Vikas Relhan Vk

इश्क़ है निंदिया तो रूह लोरी है
इश्क़ है चाँद तो रूह चकोरी है

इश्क़ है मुस्कुराहट रूह उसकी वजह है
इश्क़ जैसे हवा तो रूह उसकी फ़िज़ा है

इश्क़ है तपती दोपहरी रूह उसकी ठंडक है
इश्क़ है वन्दन तो रूह उसकी वंदक है

इश्क़ है बारिशें तो रूह उसकी फुहारें
झूमे यूँ मस्त मगन हो इश्क़ इश्क़ पुकारे
इश्क़ है इश्क़ है इश्क़ है ।।।।

Monday, 18 June 2018

रूह-ए-इश्क़ (part-1) by Vikas Relhan Vk

रुसवाईयाँ रूह की - हैरान इश्क़ हुआ
नाराज़गी रूह की - परेशान इश्क़ हुआ

तन्हाईयाँ रूह की - सुनसान इश्क़ हुआ
भीड़ बाज़ारी रूह की - गुमनाम इश्क़ हुआ

कमी रूह की - कमज़ोर इश्क़ हुआ
नमी रूह की - घनघोर इश्क़ हुआ

ख़त रूह के - पैग़ाम इश्क़ हुआ
बोली रूह की - नीलाम इश्क़ हुआ

ज़ख्म रूह के - वैद्य इश्क़ हुआ
ज़ंजीर रूह की - क़ैद इश्क़ हुआ

आंखें रूह की - आँसू इश्क़ के बहे
शायरी रूह की - बोल इश्क़ ने कहे

बादल रूह के - बारिश इश्क़ की
फ़ैसले रूह के - गुज़ारिश इश्क़ की

मंज़िलें रूह की - सफ़र इश्क़ है
रियासतें रूह की - समग्र इश्क़ है

हुनर रूह का - फ़नकार इश्क़ है
तरबें रूह की - सितार इश्क़ है

ठहराव रूह है - रफ़्तार इश्क़ है
उस पार रूह है - इस पार इश्क़ है

इंतज़ार रूह का - तड़प इश्क़ की
आना रूह का - रौनक इश्क़ की

पंख रूह के - उड़ान इश्क़ है
लब रूह के - मुस्कान इश्क़ है

स्पर्श है रूह - तो एहसास इश्क़ है
पास है रूह के - तो ख़ास इश्क़ है

आयत है रूह - तो अज़ान इश्क़ है
बोली है रूह की - तो ज़बान इश्क़ है

इश्क़ की दुनिया है रूह से - तो रूह का संसार इश्क़ है
इश्क़ करने को अपनी रूह से - बेकरार ये इश्क़ है
बिना अपनी रूह के - बेकार ये इश्क़ है
बिना अपनी रूह के - बेकार ये इश्क़ है

Friday, 8 June 2018

Yun Hi Chale The Vikas Relhan Vk Kiran Arya

Song : Yun Hi Chale the
Singer and Music : Vikas Relhan Vk
Lyrics : Kiran Arya

yun hi chale the kuchh khwahishein liye
paise kamane ke liye
paise kamate kamate ik ghar banane ke liye
khwahishein badhti gayin khud ko banane ke liye
yun hi chale the....

paisa aaya makaan bana aur bhatakte rahe
ghar banane ke liye
ab rehte hain ghar jaise makaan ki manzilon mein
aur roshni ko bhatakte hain zindagi banane ke liye
yun hi chale the....

kahin chhod aaye wo barish ki atthkheliyon ko
kiraye ki cycle aur poti hui takhtiyon ko
himmat nahi hoti baha dein fir se kaagaz ki kashtiyon ko
yun hi chale the.....

lamha lamha udhaar si zindagi hai
gar yahi zindagi hai to kya zindagi hai
to fir achha tha bachpan maza tha sabhi kuchh khone mein
ik bacha sa rehta hai is dil ke kisi ik kone mein
bahut darr lagta hai ab chhoti si chot pe rone mein

जब तुम नहीं होती by Vikas Relhan Vk


                     जब तुम नहीं होती

समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूँ,
मतलब कि तुम होती हो तो सुकून सा रहता है,
और जब तुम नहीं होती तो ऐसा लगता है जैसे साँसों में बर्फ़ सी जम गयी हो,इंतज़ार में उस धूप की जो उसे फिर से पिघला कर ख़ुद में समा ले
शरीर पतझड़ सा लगे,इंतज़ार उस सावन का जो उसे फिर से हरा भरा करदे
बेज़ुबान सी आँखें चाहत उस नमी की जो इन नम आँखों अपनी नमी से नम करदे
 ख़ामोश सी मुस्कुराहटें और किसी बंजर सी ज़मीं से लब,सूखते हुये समन्दर की तरह तलाश में प्यार की कस्तूरी की जो मृगनयनी के ही पास है
हाथ जैसे कांपते हुए छूने को बेताब तुम्हें और पाने को स्पर्श तुम्हारे प्रेम का
आत्मा जैसे बिन पानी मछली की तरह तड़पती हुई,
बेचैन हो जैसे पाने को अपना गीला संसार
जिस्म जैसे जिस्म नहीं कोई बेजान सी मूरत हो जैसे
परछाई के रूप में तुम्हें खोजती हुई
तलाश में अपने साये की जो कि तुम हो
कुछ समझ नहीं आ रहा कि और क्या कहूँ
बस इतना ही कि हर पल मुझे करना है बस यही
सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा इंतज़ार
इंतज़ार और सिर्फ़ तुम्हारा इंतज़ार
🕐🕠