Wednesday, 10 July 2019

रहम कर मालिक

ए ख़ुदा !
राज़ी हूँ मैं , जो भी है तेरी रज़ा
ना जाने इसमें भी क्या है "भला"(भलाई) छुपा
मैं तो इंसान मात्र हूँ , बस प्रेम की भाषा समझूँ
कैसे सहूँ इतना सब , कोई तो इलाज बता
मेरा यक़ीन ,मेरा भरोसा एकदम से रहा डगमगा
आँखों के आगे अंधेरा सा छाने लगा
ना जाने क्यूँ अचानक सब याद आने लगा
ज़बाँ ख़ामोश , सूखे होंठ ,नयन हो गए गीले
ऐसे में तू ही बता, कोई कैसे जीले?
अब तो बस एकमात्र विकल्प यही है कि
देखना भर रह गया है
कि तेरी रज़ा में और बुलंद होगा मेरा विश्वास
या फिर मेरी इबादतों से तू बदल डालेगा अपनी रज़ा।।
रहम कर मालिक ! रहम कर !!

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