क्या कभी इस पर ग़ौर फ़रमाया ???
दिल और दिमाग
दोनों का काम करने का तरीक़ा
बिल्कुल एक दूजे से अलग
दिमाग से सोचा जा सकता है,
और दिल हमेशा चाहता है,
ना जाने कितनी बार सोचा है जब कुछ करने को
तो वो भी नहीं हुआ जो होना चाहिए था,
पर जब जब चाहा है पूरी शिद्दत और मन्नत से कुछ भी,
तो असम्भव को भी सम्भव होते हुए देखा है।
बस फिर सोचना क्या?
चाहते हैं ना जी जान से !! जो भी चाहिये !!
No comments:
Post a Comment