याद है ना?
कहा था तुमने कि ये सब रीत रीवाज और समाज के बंधन बस अब होंगे जीवन में just formality बनकर,
फिर क्यों अब इतनी बेचैनी, क्यों इतना उदासीपन,
क्यों इतना खालीपन खलने लगा है तुमको,
क्यों झनझना रहा है मन तुम्हारा
इन सबके चक्रव्यूह में फंसकर
जबकि आपस मे बंध गए हैं हम दोनों
जन्म जन्मांतर के लिये,युग युगान्तर तक।।
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