समझ सकता हूँ मैं तेरे मन की दशा
महसूस कर सकता हूँ तेरे अंदर की उथल पुथल
छू सकता हूँ तेरे संग बीते उन सब लम्हों को
बह रहा हूँ तेरे भावों के बहते सागर में
क्योंकि
जो तुझे अब महसूस हुआ है
मैं वो मंज़र सदियों से जी रहा हूँ
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Wednesday, 26 September 2018
मन की दशा
माँ का चेहरा
जब कभी जीवन में
हताश और निराश होने लगो,
तो बस आंख बंद करो
और अपनी माँ का चेहरा देखो,
और याद करो
उनका हमारे लिए
त्याग,
बलिदान,
हमारे लिए सबसे लड़ना,
अपनी खुशियों
और अरमानों को दबा देना,
सिर्फ हमारे लिये।।
सिर्फ़ यही सोचकर
कि हम एक दिन
उनका सर गर्व से ऊंचा कर देंगे।।
और फिर आंख खोलो,
यकीनन
आप बहुत अच्छा
और
तरोताज़ा महसूस करेंगे,
और लग जाएंगे
उनके
सपनों को पूरा
करने में।।।
बदलाव (Demaand) by Vikas Relhan Vk
जो आसानी से मिले और पास भी हो,
आपकी भी हो,
उसे छोड़कर उन चीज़ों के लिए भागना
जो मिलना भी मुश्किल,
कहीं न कहीं नामुमकिन भी।।
क्यों न खुद को ज़रा सँवारा जाये,
जो रखें हर पल ख़्याल
उन्ही के ख़यालों में वक़्त गुज़ारा जाये
ज़िन्दगी मांगे फिर से बदलाव
क्यों न ज़िन्दगी को फिर से निखारा जाये।।
ऐ दिले नादाँ by Vikas Relhan Vk
ऐ दिले नादाँ
क्यूँ रखे उनकी आस
जिनकी ख़ुद की कोई आस नहीं
क्यूँ भटके उनके लिए प्यासा
जिन्हें तेरी ज़रा भी प्यास नहीं
क्यूँ है तुझे इंतज़ार उनका
जिन्हें वक़्त पर विश्वास नहीं
इश्क़ अगर करना है
तो ख़ुद से करके देख
देख लेना न रहेगी
इच्छा किसी भी चाह की
जीने लगेगा बेपरवाह
न होगी परवाह, परवाह की
न होगा डर ख़ुद से जुदा होने का
ना होगी कोई मंशा किसी भी बंधन की
न होगी महसूस ज़रूरत कभी भी संगम की
क्योंकि तू तो खुद में ही है समाया
ज़रा इश्क़ कर ख़ुद से ही तू
बन जा ज़रा अपना सरमाया
अब जीले अपने ही आगोश में
क्योंकि ख़ुद से इश्क़ ही तो ख़ुदा से इश्क़ है
ऐ दिले नादाँ ।।।
Monday, 17 September 2018
'इच्छा' by Vikas Relhan Vk
बहुत कोशिश की
कि तेरे लिए कुछ गा सकूं
पर वो सुर कहाँ से लाऊं
जिससे तुझे रिझा सकूं
तेरी ग़ैरमौजूदगी बदत्तर है मौत से भी
तेरा होना, दे दिल को सुकूँ
बस यही दुआ है मेरी रब से
कि हर सांस में तुझे पा सकूं
हर ग़ज़ल में तेरा नाम हो
हर नज़्म में तुझे गुनगुना सकूं
हर तान हो तेरी
धड़कन के साज़ पर
हर जन्म में तेरा साथ निभा सकूं।।
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Wednesday, 12 September 2018
बेटियाँ
जिन्हें देखकर
महसूस हो तुम्हारा वजूद,
ऐसा हमसाया होती हैं
बेटियाँ ।।
ऐसी परछाईयाँ
जो धूप के साथ-साथ
छाँव में भी साथ-साथ चलती हैं ।।
Saturday, 30 June 2018
ज़रूरी है by Vikas Relhan Vk
*ज़रूरी है.....*
*मेरा सपने देखना*
क्योंकि मेरे सपनों के साथ जुड़े हैं किसी और के सपने भी
*मेरा परिश्रमी होना*
क्योंकि मेरे परिश्रम के साथ जुड़ी है किसी और की मेहनत भी
*मेरा ऊर्जावान होना*
क्योंकि मेरे सम्बल के साथ जुड़ा है किसी और का साथ भी
*मेरा सकारात्मक होना*
क्योंकि साथ मे जुड़ी है किसी और की उम्मीद भी
*मेरा ख़्वाब संजोना*
क्योंकि मेरे ख्वाबों पर ही बसता है किसी और का आशियाना भी
*मेरा तेज़ दौड़ना*
क्योंकि साथ में दौड़ रहे हैं किसी और के कदम भी
*मेरा जोश में होश सम्भालना* क्योंकि साथ में है किसी और की समझदारी भी
*ज़रूरी है मेरा आसमानों को छूना*
क्योंकि छूना चाहते हैं किसी और के हाथ भी
*ज़रूरी है मेरा उड़ानों को भरना*
क्योंकि लगे हैं उसमें किसी और के पंख भी
क्योंकि *मेरे सपने*
अब सिर्फ मेरे नहीं , हैं *किसी और* के सपने भी ।
और वो *"किसी और"*
कोई और नहीं
*है मेरा ख़ुद का ख़्वाब जो अब हक़ीक़त है ।।।*
*Vikas Relhan Vk*
Wednesday, 27 June 2018
हवा...(poetry) by Vikas Relhan Vk
एक दीवार सी है हवा की
बस तेरे मेरे दरमयान
वो हवा जो रोज़ बताती है मुझे तेरे बारे में
जो रोज़ बयाँ करती तेरे दिल का हाल
और पूछती है मुझसे यूँ आकर
क्या तुम भी कुछ ऐसे ही हो क्या ?
हर रोज़ लाती है तुमसे तुम्हारी ही खुशबू चुराकर,,और महका जाती है मेरी साँसों के बगीचे को
हर रोज़ वो हवा कुछ नया लेकर आती है तुमसे
और थमा जाती है मेरे हाथों में
और लाकर मुझ पर औढ़ा देती है उन पलों की वो चादर,,जिन पलों में तुम सिर्फ मुझे ही याद करती हो ।।।
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Saturday, 23 June 2018
यही जीवन है by Vikas Relhan Vk
सबकुछ पिघलता रहता है ,
बुराई,छल,कपट,द्वेष,ईर्ष्या,क्रोध,अहंकार
और बहता रहता है
इस मन के कुरूप ज्वालामुखी से
झूठ का लावा बनकर,
और जब ये लावा पूरी तरह से फैल जाता है
मानवीयता और इंसानियत की धरती पर और
उसके अंग प्रत्यंग को जलाना आरम्भ कर देता है,
तब आसमान से फव्वारा छूटता है पश्चाताप का,
नदियाँ बहती हैं प्रार्थनाओं की,
समन्दर बनते हैं प्रायश्चित के,
और कर देते हैं ठंडा उस लावे को
और निकलता है उसमें से
ईमान,वफ़ादारी,प्यार,दोस्ती,
रिश्ते,अच्छाई,नेकी, समर्पण का सोना,
मानव के साथ साथ इस पूरी सृष्टि को
एक नई चमक देने के लिये
ये चक्र यूँ ही चलता रहता है ,
कभी लावा जल्दी पिघल जाता है
तो कभी बारिश जल्दी हो जाती है
पर होता रहता यही,यहीं सबकुछ है,
यही जीवन है ।।।
Thursday, 21 June 2018
रूह-ए-इश्क़ (part- 3)Vikas Relhan Vk
इश्क़ चला सुकून में
रूह गोद में लिटाये
इश्क़ की जो आंख लगी
रूह प्यार से सहलाये
बलिहारी जाये , निहारी जाये
है रूह सावन की तो बसंत इश्क़ है
रूह है अनंत अनंत इश्क़ है
बारिशें रूह की ठंडी हवा इश्क़ है
हया रूह में तो अदा इश्क़ है
शिकन जो रूह के माथे तड़पन में इश्क़ है
है रूह के मन की ,तन की ,धड़कन में इश्क़ है
हाथ मे हर पल रूह के है हाथ इश्क़ का
हर दुख में हर सुख में है रूह को साथ इश्क़ का
है इश्क़ रूह के लिए हर युग मे हर जनम में
इश्क़ है रूह संग हर वादे हर कसम में
इस धरती से उस अम्बर तक है रूह इश्क़ की
ख़ुशबू है फैली हर दिल मे इनके मुश्क की
ये प्रेम ग्रंथ है अनोखा रूह और इश्क़ का
हर सांस में बढ़ता जाए बंधन ये फ़रिश्त का
इश्क़ है sssss
इश्क़ है sssss
इश्क़ है sssss
रे मन !!! By Vikas Relhan Vk
रे मन !
क्यूँ भागे तू ???
अपने ही ख्वाबों के पीछे
क्यूँ हर समय अपनी ही नींद को सींचे
क्यूँ नहीं तू अपने ही बस में
क्या दौड़ता है आखिर तेरी नस नस में
क्यूँ न समझे तू कि सपना है आख़िर बर्फ़ का टुकड़ा
जिसकी हक़ीक़त पिघलना है , जमे रहना नहीं
क्यूँ न समझे कि ख़्वाब हैं आख़िर बुलबुला पानी का
जो फूट जाए अगले ही पल बिना किसी वजूद के
अगर ख़्वाब और सपने देखने ही हैं तो त्याग दे चैन की नींद और आराम का सुख
क्योंकि ख़्वाब और सपने वो नहीं जो सोकर देखे जाते हैं
ख़्वाब और सपने तो वो होते हैं जो सोने ही नहीं देते
जीना है तो किसी अपने के लिए जी,अपनों के लिए जी
अपने लिए जीना तो स्वार्थ है,और है मतलब परस्ती
और किसी अपने के लिए जीना ही है प्रेम,समर्पण, विश्वास और उम्मीद
और यही प्रेम,यही समर्पण,यही विश्वास और यही उम्मीद पहुंचाती है किसी भी ख़्वाब और सपने को हक़ीक़त तक
रे मन !!!
भाग !!!!!!
अपने सपनों के लिये नहीं, अपने अपनों के लिये !!!
Tuesday, 19 June 2018
रूह-ए-इश्क़ (part-2) by Vikas Relhan Vk
इश्क़ है निंदिया तो रूह लोरी है
इश्क़ है चाँद तो रूह चकोरी है
इश्क़ है मुस्कुराहट रूह उसकी वजह है
इश्क़ जैसे हवा तो रूह उसकी फ़िज़ा है
इश्क़ है तपती दोपहरी रूह उसकी ठंडक है
इश्क़ है वन्दन तो रूह उसकी वंदक है
इश्क़ है बारिशें तो रूह उसकी फुहारें
झूमे यूँ मस्त मगन हो इश्क़ इश्क़ पुकारे
इश्क़ है इश्क़ है इश्क़ है ।।।।
Monday, 18 June 2018
रूह-ए-इश्क़ (part-1) by Vikas Relhan Vk
नाराज़गी रूह की - परेशान इश्क़ हुआ
तन्हाईयाँ रूह की - सुनसान इश्क़ हुआ
भीड़ बाज़ारी रूह की - गुमनाम इश्क़ हुआ
कमी रूह की - कमज़ोर इश्क़ हुआ
नमी रूह की - घनघोर इश्क़ हुआ
ख़त रूह के - पैग़ाम इश्क़ हुआ
बोली रूह की - नीलाम इश्क़ हुआ
ज़ख्म रूह के - वैद्य इश्क़ हुआ
ज़ंजीर रूह की - क़ैद इश्क़ हुआ
आंखें रूह की - आँसू इश्क़ के बहे
शायरी रूह की - बोल इश्क़ ने कहे
बादल रूह के - बारिश इश्क़ की
फ़ैसले रूह के - गुज़ारिश इश्क़ की
मंज़िलें रूह की - सफ़र इश्क़ है
रियासतें रूह की - समग्र इश्क़ है
हुनर रूह का - फ़नकार इश्क़ है
तरबें रूह की - सितार इश्क़ है
ठहराव रूह है - रफ़्तार इश्क़ है
उस पार रूह है - इस पार इश्क़ है
इंतज़ार रूह का - तड़प इश्क़ की
आना रूह का - रौनक इश्क़ की
पंख रूह के - उड़ान इश्क़ है
लब रूह के - मुस्कान इश्क़ है
स्पर्श है रूह - तो एहसास इश्क़ है
पास है रूह के - तो ख़ास इश्क़ है
आयत है रूह - तो अज़ान इश्क़ है
बोली है रूह की - तो ज़बान इश्क़ है
इश्क़ की दुनिया है रूह से - तो रूह का संसार इश्क़ है
इश्क़ करने को अपनी रूह से - बेकरार ये इश्क़ है
बिना अपनी रूह के - बेकार ये इश्क़ है
बिना अपनी रूह के - बेकार ये इश्क़ है
Saturday, 9 June 2018
Friday, 8 June 2018
Yun Hi Chale The Vikas Relhan Vk Kiran Arya
Singer and Music : Vikas Relhan Vk
Lyrics : Kiran Arya
yun hi chale the kuchh khwahishein liye
paise kamane ke liye
paise kamate kamate ik ghar banane ke liye
khwahishein badhti gayin khud ko banane ke liye
yun hi chale the....
paisa aaya makaan bana aur bhatakte rahe
ghar banane ke liye
ab rehte hain ghar jaise makaan ki manzilon mein
aur roshni ko bhatakte hain zindagi banane ke liye
yun hi chale the....
kahin chhod aaye wo barish ki atthkheliyon ko
kiraye ki cycle aur poti hui takhtiyon ko
himmat nahi hoti baha dein fir se kaagaz ki kashtiyon ko
yun hi chale the.....
lamha lamha udhaar si zindagi hai
gar yahi zindagi hai to kya zindagi hai
to fir achha tha bachpan maza tha sabhi kuchh khone mein
ik bacha sa rehta hai is dil ke kisi ik kone mein
bahut darr lagta hai ab chhoti si chot pe rone mein
जब तुम नहीं होती by Vikas Relhan Vk
जब तुम नहीं होती
समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूँ,
मतलब कि तुम होती हो तो सुकून सा रहता है,
और जब तुम नहीं होती तो ऐसा लगता है जैसे साँसों में बर्फ़ सी जम गयी हो,इंतज़ार में उस धूप की जो उसे फिर से पिघला कर ख़ुद में समा ले
शरीर पतझड़ सा लगे,इंतज़ार उस सावन का जो उसे फिर से हरा भरा करदे
बेज़ुबान सी आँखें चाहत उस नमी की जो इन नम आँखों अपनी नमी से नम करदे
ख़ामोश सी मुस्कुराहटें और किसी बंजर सी ज़मीं से लब,सूखते हुये समन्दर की तरह तलाश में प्यार की कस्तूरी की जो मृगनयनी के ही पास है
हाथ जैसे कांपते हुए छूने को बेताब तुम्हें और पाने को स्पर्श तुम्हारे प्रेम का
आत्मा जैसे बिन पानी मछली की तरह तड़पती हुई,
बेचैन हो जैसे पाने को अपना गीला संसार
जिस्म जैसे जिस्म नहीं कोई बेजान सी मूरत हो जैसे
परछाई के रूप में तुम्हें खोजती हुई
तलाश में अपने साये की जो कि तुम हो
कुछ समझ नहीं आ रहा कि और क्या कहूँ
बस इतना ही कि हर पल मुझे करना है बस यही
सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा इंतज़ार
इंतज़ार और सिर्फ़ तुम्हारा इंतज़ार
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Friday, 18 May 2018
Khwabon ke jaal Vikas Relhan Vk Kiran Arya Lyrics
Singer and Music : Vikas Relhan Vk
Lyrics : Kiran Arya
khwabon ke jaal bunti hun
kuchh uljhi hui si hasaratein hain
kaisi haseen hogi ye duniya
roshni ki hasaratein hain
ik arsa hua ye haath bane hain
a maa ye nanhe haath tarasate hain
ye aankhein mere pitah si aankhein hain
kuchh log hasaraton mein bas yun hi bhatakte hain
tumne maanga beta samajhkar beti hi bankar aankh banun mere pitah
khoon pilaya maa tumne apna jeevan ki mai aas banun meri maa
badra ka rang kaisa hoga suna tha tujhse us saavan mein
kya kya hoga kaun aayega aur phool khilenge is aangan mein
badra ka rang kyun laal sa lagta hai
duniya ka yahi rivaaz sa lagta hai
meri to aankhein bhi nahi khuli
maut ka kyun aagaaz sa lagta hai
roshni ki chahat mein andheron ke saaye hue hain
mere apne hi aaj yamraj se aaye hue hain
maar dena ik baar mil to lete mere pitah
mar dena ik baar mil to leti meri maa
tumko to shayad dard nahi mujhko to dard bahut hoga
tumko to shayad fikr nahi mujhko to marm bahut hoga
ik baar muilne ki ichha hai ye duniya dekhne ki ichha hai
tumse bahut hai pyar kiya a maa
milne ki ichha hai
milne ki ichha hai maa
milne ki ichha hai pitah
milne ki ichha hai
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https://soundcloud.com/vikas-relhan/khwabon-ke-jaal-nanhi-pariby-vikas-relhan
Bazaar by Vikas Relhan Vk Kiran Arya
Singer and Music : Vikas Relhan Vk
Lyrics : Kiran Arya
hairaniyat hai bahut bechne wale baithe hain
bahut khareedar
har koi bazaaru hai neelam aur
har koi izzatdar
imaan hi nahi insaan bik raha hai sar-e-bazaar yahan
Bazaar garam hai ajkal afwaahon ka
ke imaan bik raha hai sar-e-bazaar yahan
bazaar garam hai.....
humne bhi daanv lagaye be abroo hokar
faqat keemat lagane ke liye
kitne bikaau hain yahi aazmane ke liye
bazaar garam hai.....
har shakhs baitha hai yahan parde me be naqaab
imaan ki neelami ke liye be jhijhak
be abroo sab bechkar sab kuchh khojane ke liye
bazaar garam hai.....
bahut koshish ki aaj imaan bik jaye yahan
humko khareed paye wo khareedar hai kahan
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Tuesday, 15 May 2018
Lyrics Mai Vi Kade Banna Rakhdi Khushpreet Kaur Vikas Relhan Vk
Special Song for Rakhi/Rakshabandhan/Rakhdi/Bhai Behan/Brother Sister
Song : Mai Vi Kade Banna Rakhdi
Singer : Khushpreet Kaur,Vikas Relhan Vk
Music Composed By : Vikas Relhan Vk
Lyrics :Gurpreet Kaur,Vikas Relhan Vk
koyal kooke bagaan de vich
kare tere aggey fariyadaan
na rakhin bhainan nu veeran baajhon
ga ga ke kare ardaasan
koo koo gaave
sun dateya dateya ve daateya
daateya ve daateya sun mere daateya
ik bhain ajj mangdi a veer
mai vi kade banna rakhdi
meri sour (sanvaar)de tu taqdeer
mai vi kade banna rakhdi
dhan mai begana ik din tur jaungi
budhe ma peyan di laathi kisnu bnaungi
haan tere dar thhod koi na
veer deke jag vich pade seer
mai vi kade banna rakhdi
ik bhain ajj mangdi a veer
mai vi kade banna rakhdi
daateya ve daateya sun mere daateya
kookdi a koyal ajj kare fariyaad ve
sunle pukar tu meri ardaas ve
veeran baajhon sunna sunna amdi da veeda a
likhde tu lekhaan vich ki janda tera a
mai har vele khair mangdi aan
naale manga jiven mangde faqeer
mai vi kade banna rakhdi
ik bhain ajj mangdi a veer
mai vi kade banna rakhdi
daateya ve daateya sun mere daateya
Listen to Mai Vi Kade Banna Rakhdi from Mai Vi Kade Banna Rakhdi on #JioMusic http://share.media.jio.com/OTYzXzk2MjYwMl8xXnNvbmdeZG1scllYTnJkVzFoY2kweE9UYzQ=
