तू उससे ख़फ़ा ना हो, प्यार ना छोड़
इबादतें रख ज़ेहन में, ऐतबार ना छोड़
कर्म कर, उम्मीद ना रख
हौसला रख, सब्र ना छोड़
बेशक़ डगमगा, पर चलता चल
अंजान ही सही, राह ना छोड़
हिम्मत चाहिए? डटा रह
गिर पड़, पर उठना ना छोड़
लोग रोकेंगे, अपने भी कोसेंगे
खींचें बेशक पीछे बार बार,
तू सांस भर, दौड़ना ना छोड़
प्यार भी होगा, तक़रार भी होगा,
नफ़रतें भी होंगी,
पीठ पीछे वार भी होगा
हर कोई तुझे घसीटने को
तैयार भी होगा
साज़िशें होंगी
आत्मा की आवाज़ को
झूठ बताया जाएगा,
रंजिशें भी होंगी
पाक रिश्ते को
खून के आंसू भी रुलाया जाएगा
गिरा दी जाएंगी विश्वास की इमारतें
दिखावे के जंगल भरपूर होंगे
जो कभी जीने का ज़रिया थे
वो सब तुझसे दूर होंगे
पर तु घबराना नहीं
तेरा ईश्वर तेरे साथ है
किसी को हो ना हो
उसे तुझ पर पूरा विश्वास है
आख़िर उसी की रज़ा से हुआ सब
चाहे हुआ पहले, या जो हो रहा अब
तू उससे ख़फ़ा ना हो, प्यार ना छोड़
इबादतें रख ज़ेहन में, ऐतबार ना छोड़
तूने जिसके लिए जो किया,
दिल से किया
यही तेरा फ़क्र है
मंज़िलों तक पहुंचा बस वोही
जिसने रखा सब्र है
प्रेम करना तेरी नियति है
व्यवहार ना छोड़
तू उससे ख़फ़ा ना हो, प्यार ना छोड़
इबादतें रख ज़ेहन में, ऐतबार ना छोड़