ओढ़ कर हर रंग मेरा,
वो भी रंगरेज़ हो गया।।
कि वो दिखता भी मुझसा है,
वो बोलता भी मुझसा है,
वो चलता भी मुझसा ही,
और गुनगुनाता भी मुझसा ही है,
हर रंग उसका अब मुझसे ही
रहता है साये की तरह हर वक़्त संग मेरे,
मैं ख़ुश सूरज सा,तो वो बन मेरी परछाई
झूमता नज़र आये
और मैं उदास शाम ,तो भी अँधेरों में समा जाये।
पहले मैं रंगरेज़ था अकेला ही,
ओढ़ कर हर रंग मेरा,
वो भी रंगरेज़ हो गया।।
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