Friday, 28 June 2019

यूँ ही ना वक़्त ज़ाया करो - Vikas Relhan Vk


यूँ ही ना वक़्त ज़ाया करो
जहां क़द्र हो आपके एहसास की
बस वहीं दिल की बात सुनाया करो
हमसफ़र बनना कोई खाला जी का खेल नहीं
यूँ ही ना हर किसी से उम्मीद लगाया करो
मन्नत और मिन्नत वहीं करो
जहां पूरी होने की आस हो
यूँ ही किसी भी ग़ैर के लिये
रास्तों पर आंखें न गढाया करो
जो चले सिर्फ़ तुमसे ही मिलने के लिए
बस उसी के लिये नज़रें बिछाया करो
वो बैठा रहे चाहे मुँह फुलाकर दिन महीने और साल
तुम तो अच्छे इंसान हो,उसका हाल चाल ही पूछ आया करो
जितने भी हैं दगाबाज़ और मतलबपरस्त आसपास
अपने दिलो दिमाग से उनका सफाया करो
हर कोई मशगूल है अपना उल्लू सीधा करने में
तुम भी बस अपने काम में दिल लगाया करो
सब मतलब के यार हैं और हैं एहसान फ़रामोश
हर किसी को ना नेकी का पाठ पढ़ाया करो
बिकाऊ है दिल का बाज़ार और बोली लगती है ख़्वाबों की
तुम भी कभी कभी कुछ सपने बेच आया करो
हाथ न फैलाना पड़े किसी ग़रीब के भी आगे
कम से कम इतना तो रोज़ कमाया करो
कि मंज़िल तेरी राह तक रही है हर पल
इन्तज़ार में किसी के ना वक़्त गंवाया करो
जो दे दे सारे हक़ अपने दिल,जिस्म,जान और रूह के भी तुम्हें
उसके लिये तो जान पर भी खेल जाया करो
उसके लिये तो जान पर भी खेल जाया करो।।

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