Friday, 3 December 2021

प्यार ना छोड़

तू उससे ख़फ़ा ना हो, प्यार ना छोड़
इबादतें रख ज़ेहन में, ऐतबार ना छोड़

कर्म कर, उम्मीद ना रख
हौसला रख, सब्र ना छोड़
बेशक़ डगमगा, पर चलता चल
अंजान ही सही, राह ना छोड़
हिम्मत चाहिए? डटा रह
गिर पड़, पर उठना ना छोड़

लोग रोकेंगे, अपने भी कोसेंगे
खींचें बेशक पीछे बार बार,
तू सांस भर, दौड़ना ना छोड़

प्यार भी होगा, तक़रार भी होगा,
नफ़रतें भी होंगी,
पीठ पीछे वार भी होगा
हर कोई तुझे घसीटने को 
तैयार भी होगा
साज़िशें होंगी
आत्मा की आवाज़ को
झूठ बताया जाएगा,
रंजिशें भी होंगी
पाक रिश्ते को 
खून के आंसू भी रुलाया जाएगा
गिरा दी जाएंगी विश्वास की इमारतें
दिखावे के जंगल भरपूर होंगे
जो कभी जीने का ज़रिया थे
वो सब तुझसे दूर होंगे

पर तु घबराना नहीं
तेरा ईश्वर तेरे साथ है
किसी को हो ना हो
उसे तुझ पर पूरा विश्वास है
आख़िर उसी की रज़ा से हुआ सब
चाहे हुआ पहले, या जो हो रहा अब

तू उससे ख़फ़ा ना हो, प्यार ना छोड़
इबादतें रख ज़ेहन में, ऐतबार ना छोड़

तूने जिसके लिए जो किया,
दिल से किया
यही तेरा फ़क्र है
मंज़िलों तक पहुंचा बस वोही
जिसने रखा सब्र है
प्रेम करना तेरी नियति है
व्यवहार ना छोड़
तू उससे ख़फ़ा ना हो, प्यार ना छोड़
इबादतें रख ज़ेहन में, ऐतबार ना छोड़

Wednesday, 28 August 2019

तुम्हारी धुन में - Vk

पता ही नहीं चला कि वक़्त कब गुज़र गया
कि अभी जैसे कल की ही तो बात थी
ख़त्म सा हो चला सफ़र तुम संग
पर मानो अभी ताज़ा ताज़ा ही तो मुलाकात थी
इस कदर खो सा गया था मैं तुम्हारी धुन में
कि कोई और आवाज़ जैसे सुनाई देना ही बंद हो गई
तुम्हारी धुन में ही तो वो जादू चला
कि मेरी दुनिया इक हुजूम से चंद हो गई
असर तुम्हारी धुन का अब तक छाया है मुझपर
कि होश में आने की अब चाह ही ना रही
पर ये वक़्त इतना ज़ालिम है कि बजा रहा लगातार अपनी ही शहनाई
कि इसकी धुन के आगे दुनिया का पत्ता पत्ता नाचने को मजबूर
मैं कैसे समझूँ महफूज़ ख़ुद को, कैसे करूँ महसूस तुम्हें
क्योंकि लगातार झिंझोड़े जा रहा इसका बेसुरापन मेरे मन को
जो मोहित और मदहोश है,तुम्हारी धुन में।।

Wednesday, 31 July 2019

लालच

जहां दिखा ज़्यादा ज़्यादा
वहीं लुढ़क गया प्यादा
भूल गया हर वादा
नहीं रहा नेक इरादा
पर ध्यान रहे
कहीं ज़्यादा ज़्यादा के चक्कर में
हो ना जाये पूरे से आधा
और फिर कहना पड़े हारकर
क्यों किया ज़्यादा ज़्यादा
क्यों रहे हर समय छीनने में ही
क्यों न किया बांटने का इरादा
क्यों ना जिया जीवन सादा
क्यों किया ज़्यादा ज़्यादा
क्यों भूल गए हर वादा
कि अब बचा ही नहीं आधा
काश जिया होता जीवन सादा!!
काश जिया होता जीवन सादा !!!

Saturday, 20 July 2019

कलाकार और उम्र ( Artist & Age ) - by Vikas Relhan Vk

उम्र हर किसी पर अपना शिकंजा कसती है
हर किसी को करके रखती है अपने वश में
हर किसी को अहसास करवाती है पल पल घटती हुई साँसों का और बीते हुए पल का,
पर इस शिकंजे से अगर कोई आज़ाद है तो वो है कलाकार, हाँजी कलाकार!!
क्योंकि
कलाकार की कोई उम्र होती ही नहीं
कलाकार उम्रों का मोहताज हुआ ही नहीं
कलाकार कभी बूढ़ा होता ही नहीं।
अपने मन से, ख़्यालों से, विचारों से,कल्पना से और सृजन से,
वो हमेशा जवान और तरो ताज़ा रहता है,
निराशा में आशा, अविश्वास में विश्वास, असम्भव में सम्भव, असंभावना में सम्भावना, उदासी और ग़म में ख़ुशी, बुराई में भलाई और अच्छाई और नकारात्मकता में सकारात्मकता की रोशनी ढूंढ लेने की क्षमता होती है कलाकार में।
अपनी रचनाओं, अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के माध्यम से,कल्पनाओं के समंदर में गोते लगाता हुआ, वो हर जगह कहीं ना कहीं किसी ना किसी गहराई के कोने में उम्मीद की किरण खोज ही निकालता है।
सही मायने में अगर कहा जाए तो कलाकार गुरु समान है बल्कि गुरु ही कहा जाए तो उचित होगा क्योंकि इस दुनिया और ईश्वर को आपस मे जोड़ने वाली बीच की कड़ी होता है कलाकार।।
हर कला के पुजारी को मेरा कोटि कोटि प्रणाम।।
सभी कलाकारों और कला प्रेमियों को सादर अभिनंदन।।
मेरी ये रचना सभी कलाकारों को समर्पित।।
धन्यवाद,
आपका अपना,
विकास रेल्हान (Vikas Relhan Vk)

Saturday, 13 July 2019

कुदरत क्या और किस्मत क्या?

नयी मंज़िलों की तरफ बढ़ने को
बेताब हैं मेरे कदम
मग़र रास्तों को गवारा नहीं
कि उनके सिवा कोई और
मंज़िलों की दहलीज को छुये।।

आसमाँ छूने को तैयार हैं ये हाथ मेरे
मग़र हवाओं को मंज़ूर नहीं
कि उनके सिवा कोई और
ऊँचाइयों को महसूस करे।।

समंदर की गहराई में
गोते लगाने को तैयार है
ये मन मेरा मग़र
लहरों को बर्दाश्त नहीं
कि उनके सिवा कोई और
पानी की गहराई को समझे।।

जब वजूद ही हाथ छोड़ दे
तो कुदरत क्या और किस्मत क्या???

Thursday, 11 July 2019

बस तू ही !!

शायद  कुछ गलतफहमी हुई है
शायद कोई तेरे मेरे दरमियान है
शायद तू नाराज़ है मुझसे
पर वजह मैं नहीं
कोई और है
कह तो दूं हर बात तुझसे
पर तू कभी हक़ तो देके देख
रही बात दुनिया की
तो ध्यान से सुन
मुझे नहीं परवाह किसी की
क्योंकि तू ही मेरी उदासी की शाम
और मेरी खुशियों की भोर है।।

मेरे मन की पीड़ा - Vk

जीवन के इस मोड़ पर
जहां इस वक़्त खड़ा हूँ मैं
इस मनस्थिति के साथ
कि जीना बहुत मुश्किल है
बिन तुम्हारे

पिघल रहा हूँ किसी बर्फ़ की नदी की तरह
और बह रहा हूँ क़तरा क़तरा
उस बंजर ज़मीं पर
जिस पर जितना भी पानी उड़ेल दो
मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है
उगना उम्मीदों की फ़सल का

जल रहा हूँ उस ज्वालामुखी की तरह
जिसे ना कोई चिंगारी दिखाता है
और ना ही कोई मजबूर करता है
उगलने के लिए लावा
बस वो जलता है अपने ही अंदर के ऊष्म मंथन से
भड़कता है अपने ही अंदर की आग से
लपटें उठाता है अपनी ही गर्मी से
और जला डालता है अपने साथ साथ
हर सामने आने वाली
दुनियावी चीज़ों को भी

इस दुनिया में कोई भी
इस बात के लिए नहीं होगा राज़ी
कि किसी की भी वजह से
मैं पिघलता रहा
और जलता रहा
क्योंकि हर कोई मशगूल है
अपनी अपनी दुनिया को सजाने में
हर कोई है व्यस्त
अपनी अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में
क्यों लेगा ऐसे में कोई
मेरी तक़लीफ़ों की ज़िम्मेदारी

बस अब थकने सा लगा हूँ
धैर्य साथ छोड़ने लगा है
सब्र गिरने सा लगा है शायद
सम्भलना चाहता हूँ
जीना चाहता हूँ
खुश रहना चाहता हूँ

काश!!! कि कोई उम्रदराज़ आकर
दे दे मुझे अनुभव अपना
कि क्या होता है इसके बाद?
कौनसा होगा अगला पड़ाव?
कैसी होगी मन की स्थिति?
और कितना हो जाएगा परिपक्व मन?
जब ये सब होता है महसूस
ज़िन्दगी के सफ़र में
क्योंकि उनसे बेहतर कौन जानेगा?
उनसे बेहतर कौन समझेगा?
मेरे मन की पीड़ा!!!
मेरे मन की पीड़ा!!!
काश!!!!!

Wednesday, 10 July 2019

पहली दफा !!!

पहली दफ़ा!!!
पहली दफ़ा तेरी बात पर यकीं सा नहीं हो रहा
पहली दफ़ा तू लगा कुछ बदला बदला सा है
पहली दफ़ा अंदर तक हिल गया मैं
पहली दफ़ा साँस हलक में अटका अटका सा है
पहली दफ़ा बहुत ही ज़्यादा डर सा गया हूँ
पहली दफ़ा दिल सहमा सहमा सा है
पहली दफ़ा तुझे ग़ैर मौजूद पाया है अपनी ज़िन्दगी में
पहली दफ़ा मेरा जहां सूना सूना सा है
पहली दफ़ा ठेस पहुंची है मेरी इबादतों को
और तू कहता है कि ये सब बेमतलब सा है?


तुम्हारा होना !!!

तुम्हारा होना!!!
तपती गर्मी की चिलचिलाती धूप में भी भीगा भीगा सा रहता हूँ, मैं सावन सावन सा झूमता हूँ,
जब तू हवा भर सा भी छू जाता है मुझे एहसासों में

तुम्हारा ना होना!!!
धड़कते हुए बादलों की मस्तियों में बहने वाली तेज़ मूसलाधार बारिश भी चुभती है,
छील के रख देती है जिस्म मेरा,
लहूलुहान कर डालती है उसमें बसे तेरे मेरे लम्हों को,
जब तू पल भर के लिए भी अलग कर लेता है खुद को मेरे ख़यालों से।।।

याद है ना !!!

याद है ना?
कहा था तुमने कि ये सब रीत रीवाज और समाज के बंधन बस अब होंगे जीवन में just formality बनकर,
फिर क्यों अब इतनी बेचैनी, क्यों इतना उदासीपन,
क्यों इतना खालीपन खलने लगा है तुमको,
क्यों झनझना रहा है मन तुम्हारा
इन सबके चक्रव्यूह में फंसकर
जबकि आपस मे बंध गए हैं हम दोनों
जन्म जन्मांतर के लिये,युग युगान्तर तक।।

और क्या चाहिए!!!

पहले "मैं" इश्क़ में था
अब इश्क़ "मुझमें" है।।
और क्या चाहिए!!!
जिसे जीने की बस चाह थी
वो मुझमें ही समा गया।।
और क्या चाहिए!!!

अनदेखा !! अनसुना !!!

अनदेखा!!! अनसुना!!!
सकारात्मकता !!! नकारात्मकता !!!

क्या इन शब्दों से कुछ सीखने को मिलता है?
मेरा जवाब है "हाँजी"
कि कोई देखे या अनदेखा करदे,
कोई सुने या अनसुना करदे,
आप अपना कर्म ज़रूर पूरा कीजिये।
सृष्टि की हर वस्तु में सकारात्मकता और नकारात्मकता दोनों छुपे हैं,
आप क्या ढूंढते हैं,ये आप पर निर्भर है।।

सफ़र ख़त्म होने को है

और कितना दूर भागूँ मैं तुझसे?
अब तो रास्ता भी ख़त्म होने को है।।
और कितना जागूँ मैं रात भर?
अब तो अंधेरा भी ख़त्म होने को है।।
और कितना याद करूँ मैं तुझे?
अब तो याददाश्त भी धूमिल होने को है।।
और कितना करूँ इंतज़ार तेरा?
अब तो वक़्त भी ख़त्म होने को है।।
और कितनी आहें भरूँ मैं तेरे लिये?
अब तो साँसें भी ख़त्म होने को हैं।।
और कितना चलूँ मैं तेरे बिन?
अब तो सफ़र भी ख़त्म होने को है।।

उम्र

आपकी ज़िंदगी मे तीन उम्रों के लोग होते हैं। एक आपसे बड़े,एक आपसे छोटे और एक आपके हमउम्र।
बड़ों से मिलता है आपको अनुभव, तज़ुर्बा।।
छोटों से आपको मिलता है जोश,ऊर्जा, जुनून।।
तो आपको हमउम्र से क्या मिलता है?
उनसे मिलता है साथ ज़िन्दगी भर का
जो बाकी दोनों उम्रों से मिले हर एहसास को हमारे साथ साथ लेकर चलने की कोशिशें करता रहता है,लगातार,उम्र भर के लिये।।

रंगरेज़

ओढ़ कर हर रंग मेरा,
वो भी रंगरेज़ हो गया।।
कि वो दिखता भी मुझसा है,
वो बोलता भी मुझसा है,
वो चलता भी मुझसा ही,
और गुनगुनाता भी मुझसा ही है,
हर रंग उसका अब मुझसे ही
रहता है साये की तरह हर वक़्त संग मेरे,
मैं ख़ुश सूरज सा,तो वो बन मेरी परछाई
झूमता नज़र आये
और मैं उदास शाम ,तो भी अँधेरों में समा जाये।
पहले मैं रंगरेज़ था अकेला ही,
ओढ़ कर हर रंग मेरा,
वो भी रंगरेज़ हो गया।।

बस इतना सा और कहूँ

तेरे मेरे बीच कोई दीवार नहीं, कोई दरार नहीं
मैं और तू,किसी भी ग़लतफ़हमी का शिकार नहीं
तू है ना मेरा !!मुझे किसी और की दरकार नहीं
अब यही ज़रिया है कि मैं लिखूं
और करूँ तुझसे ही हर बात
वरना हर बात लिखने को तो
मेरा दिल भी तैयार नहीं
तू मुझे समझता है,और मैं तुझे,
मेरी नज़र में हमसे ज्यादा
कोई और समझदार नहीं
बस इतना सा और कहूँ, कि
तेरे सिवा अब और किसी से प्यार नहीं !!!

रहम कर मालिक

ए ख़ुदा !
राज़ी हूँ मैं , जो भी है तेरी रज़ा
ना जाने इसमें भी क्या है "भला"(भलाई) छुपा
मैं तो इंसान मात्र हूँ , बस प्रेम की भाषा समझूँ
कैसे सहूँ इतना सब , कोई तो इलाज बता
मेरा यक़ीन ,मेरा भरोसा एकदम से रहा डगमगा
आँखों के आगे अंधेरा सा छाने लगा
ना जाने क्यूँ अचानक सब याद आने लगा
ज़बाँ ख़ामोश , सूखे होंठ ,नयन हो गए गीले
ऐसे में तू ही बता, कोई कैसे जीले?
अब तो बस एकमात्र विकल्प यही है कि
देखना भर रह गया है
कि तेरी रज़ा में और बुलंद होगा मेरा विश्वास
या फिर मेरी इबादतों से तू बदल डालेगा अपनी रज़ा।।
रहम कर मालिक ! रहम कर !!

सुनो !! एक काम करना !!!

सुनो !! एक काम करना !!!
मेरी ख़ातिर अपना ख़्याल रखना
मैं कुछ भी लिखूं,पर तुम प्यार ही देखना
मैं चाहे तुम्हें देखूं, पर तुम संसार देखना
हाँ संसार देखना,पर मुझमें ही हर बार देखना
संसार देखना केवल अपने मन की आँखों से
परेशान मत होना कभी दुनिया की बातों से
नई उम्मीद से ही हर नये दिन की शुरुआत करना
और हर पल हर ख़ुशी को अपनी बाहों में भरना
आने वाला कल बस तुम्हारा है
जिसे ख़ुदा ने सिर्फ़ तुम्हारे लिए सँवारा है
यही जुनून अपने ज़ेहन में रखना
अपनी हर ज़िद को हक़ीक़त में बदलना
मेरी परवाह मत करना ,बिन तुम्हारे रह लूँगा
तुम्हारे लिये, तुम्हारी जुदाई भी हंसके सह लूँगा
इस जन्म तेरा साथ हाथ की लकीरों में नहीं
बस यही सोचकर चुपचाप जियूँगा ज़िन्दगी
मगर हर घड़ी अब इंतज़ार बस तुम्हारा रहेगा
ये प्यार तुमसे था,तुमसे है और तुमसे ही रहेगा !!