Wednesday, 26 September 2018

ऐ दिले नादाँ by Vikas Relhan Vk

ऐ दिले नादाँ
क्यूँ रखे उनकी आस
जिनकी ख़ुद की कोई आस नहीं
क्यूँ भटके उनके लिए प्यासा
जिन्हें तेरी ज़रा भी प्यास नहीं
क्यूँ है तुझे इंतज़ार उनका
जिन्हें वक़्त पर विश्वास नहीं
इश्क़ अगर करना है
तो ख़ुद से करके देख
देख लेना न रहेगी
इच्छा किसी भी चाह की
जीने लगेगा बेपरवाह
न होगी परवाह, परवाह की
न होगा डर ख़ुद से जुदा होने का
ना होगी कोई मंशा किसी भी बंधन की
न होगी महसूस ज़रूरत कभी भी संगम की
क्योंकि तू तो खुद में ही है समाया
ज़रा इश्क़ कर ख़ुद से ही तू
बन जा ज़रा अपना सरमाया
अब जीले अपने ही आगोश में
क्योंकि ख़ुद से इश्क़ ही तो ख़ुदा से इश्क़ है
ऐ दिले नादाँ ।।।

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