एक दीवार सी है हवा की
बस तेरे मेरे दरमयान
वो हवा जो रोज़ बताती है मुझे तेरे बारे में
जो रोज़ बयाँ करती तेरे दिल का हाल
और पूछती है मुझसे यूँ आकर
क्या तुम भी कुछ ऐसे ही हो क्या ?
हर रोज़ लाती है तुमसे तुम्हारी ही खुशबू चुराकर,,और महका जाती है मेरी साँसों के बगीचे को
हर रोज़ वो हवा कुछ नया लेकर आती है तुमसे
और थमा जाती है मेरे हाथों में
और लाकर मुझ पर औढ़ा देती है उन पलों की वो चादर,,जिन पलों में तुम सिर्फ मुझे ही याद करती हो ।।।
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