Monday, 17 September 2018

'इच्छा' by Vikas Relhan Vk


बहुत कोशिश की
कि तेरे लिए कुछ गा सकूं
पर वो सुर कहाँ से लाऊं
जिससे तुझे रिझा सकूं

तेरी ग़ैरमौजूदगी बदत्तर है मौत से भी
तेरा होना, दे दिल को सुकूँ
बस यही दुआ है मेरी रब से
कि हर सांस में तुझे पा सकूं

हर ग़ज़ल में तेरा नाम हो
हर नज़्म में तुझे गुनगुना सकूं
हर तान हो तेरी
धड़कन के साज़ पर
हर जन्म में तेरा साथ निभा सकूं।।
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