Thursday, 21 June 2018

रूह-ए-इश्क़ (part- 3)Vikas Relhan Vk

इश्क़ चला सुकून में
रूह गोद में लिटाये
इश्क़ की जो आंख लगी
रूह प्यार से सहलाये
बलिहारी जाये , निहारी जाये

है रूह सावन की तो बसंत इश्क़ है
रूह है अनंत अनंत इश्क़ है
बारिशें रूह की ठंडी हवा इश्क़ है
हया रूह में तो अदा इश्क़ है
शिकन जो रूह के माथे तड़पन में इश्क़ है
है रूह के मन की ,तन की ,धड़कन में इश्क़ है
हाथ मे हर पल रूह के है हाथ इश्क़ का
हर दुख में हर सुख में है रूह को साथ इश्क़ का
है इश्क़ रूह के लिए हर युग मे हर जनम में
इश्क़ है रूह संग हर वादे हर कसम में
इस धरती से उस अम्बर तक है रूह इश्क़ की
ख़ुशबू है फैली हर दिल मे इनके मुश्क की
ये प्रेम ग्रंथ है अनोखा रूह और इश्क़ का
हर सांस में बढ़ता जाए बंधन ये फ़रिश्त का
इश्क़ है sssss
इश्क़ है sssss
इश्क़ है sssss

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