समझ सकता हूँ मैं तेरे मन की दशा महसूस कर सकता हूँ तेरे अंदर की उथल पुथल छू सकता हूँ तेरे संग बीते उन सब लम्हों को बह रहा हूँ तेरे भावों के बहते सागर में क्योंकि जो तुझे अब महसूस हुआ है मैं वो मंज़र सदियों से जी रहा हूँ 🕐🕠
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