यूँ ही ना वक़्त ज़ाया करो
जहां क़द्र हो आपके एहसास की
बस वहीं दिल की बात सुनाया करो
हमसफ़र बनना कोई खाला जी का खेल नहीं
यूँ ही ना हर किसी से उम्मीद लगाया करो
मन्नत और मिन्नत वहीं करो
जहां पूरी होने की आस हो
यूँ ही किसी भी ग़ैर के लिये
रास्तों पर आंखें न गढाया करो
जो चले सिर्फ़ तुमसे ही मिलने के लिए
बस उसी के लिये नज़रें बिछाया करो
वो बैठा रहे चाहे मुँह फुलाकर दिन महीने और साल
तुम तो अच्छे इंसान हो,उसका हाल चाल ही पूछ आया करो
जितने भी हैं दगाबाज़ और मतलबपरस्त आसपास
अपने दिलो दिमाग से उनका सफाया करो
हर कोई मशगूल है अपना उल्लू सीधा करने में
तुम भी बस अपने काम में दिल लगाया करो
सब मतलब के यार हैं और हैं एहसान फ़रामोश
हर किसी को ना नेकी का पाठ पढ़ाया करो
बिकाऊ है दिल का बाज़ार और बोली लगती है ख़्वाबों की
तुम भी कभी कभी कुछ सपने बेच आया करो
हाथ न फैलाना पड़े किसी ग़रीब के भी आगे
कम से कम इतना तो रोज़ कमाया करो
कि मंज़िल तेरी राह तक रही है हर पल
इन्तज़ार में किसी के ना वक़्त गंवाया करो
जो दे दे सारे हक़ अपने दिल,जिस्म,जान और रूह के भी तुम्हें
उसके लिये तो जान पर भी खेल जाया करो
उसके लिये तो जान पर भी खेल जाया करो।।
Friday, 28 June 2019
यूँ ही ना वक़्त ज़ाया करो - Vikas Relhan Vk
Tuesday, 25 June 2019
गुरु और शिष्य
जिन्हें अपने पास बिठाकर एक एक सुर की समझ और गायकी दी हो,
हर वो चीज़ ,हर वो मंत्र सिखाया हो जो हमें हमारे गुरुजनों ने बड़े ही स्नेह और वात्सल्य से सिखाया,
जब वही शिष्य साथ खड़े होकर गाने लगें तो मन और आत्मा ख़ुशी से झूम उठते हैं,
बार बार दुआयें और आशीर्वाद बरसता है उनके लिए हृदय से,
और सर श्रद्धा से झुक जाता है अपने परमात्मा, अपने माता पिता और अपने गुरुजनों के प्रति,
जिन्होंने हमें इस काबिल बना दिया कि हम पीढ़ी दर पीढ़ी संगीत की सेवा करते जायें।।
गुरुजनों को कोटि कोटि नमन।।
संगीत को आगे सही दिशा में बढ़ाने वाले शिष्यों को प्यार और आशीर्वाद।।।
Vikas Relhan Vk
Thursday, 20 June 2019
Duniya aur tum | दुनिया और तुम | Vikas Relhan Vk
एक दुनिया वो, जो मुद्दतों से साथ होकर भी अपनी ना हो सकी,
और एक तुम हो , जो मुद्दतों बाद ज़िन्दगी में आई
और हमारी दुनिया ही बन गयी।
एक दुनिया वो , जिसकी वजह हम बने हमसे जुड़ी हर दुनिया से मिलाने में
और वो हमें ही दरकिनार कर,उनसे मिलती चली गई,
और एक तुम हो , जिसने अपनी हर दुनिया से नाता तोड़,हमें ही अपनी दुनिया बना लिया।
एक दुनिया वो, जो झूठ और नफ़रतों का सहारा लेकर सीढ़ियां चढ़ रही है,
और एक तुम हो , जो सच्चाई और प्रेम की मूरत है।
एक दुनिया वो, जो दिखती कुछ और,और दिखाती कुछ और है,
और एक तुम हो , जिसके पास हमें देखने के अलावा कुछ भी नहीं।
Wednesday, 19 June 2019
झरना - Vikas Relhan Vk
झरना
ये झरना कितना अजीब है
हर वक़्त रहता है बहने को तैयार
दौड़ता है हर पल बाहर की ओर
और करता हैं कोशिशें बिखर जाने की
उकसाता है कि टूट जाऊँ मैं
बिखर ही जाऊँ
लहरों सा इसका उछाल
उमड़ता है बार बार
झिंझोड़े सौ दफ़ा
हिलाये हज़ारों बार
मेरे दिल की हर दीवार
समझाऊं लाखों दफ़ा
नहीं मानने को तैयार
मगर
रोक के रखा है इसे
यही आस बस इक दिल मे लिये
कि जिस दिन भी तू मुझसे मिले
बहा दूंगा मैं ये झरना
तुमसे लगके गले
सम्भाल के रखा है इक इक कतरा इस झरने का
कहीं बह न जाएं मेरे जज़्बात भी
इन आँखों के झरने के साथ ही
ये झरना है मेरे आँसुओं का
जो बहता है बस तेरे लिए
चाहे हो ख़ुशी, या ग़म।।
Vikas Relhan Vk
Saturday, 18 May 2019
इश्क़ बनाम इंतज़ार-Vikas Relhan Vk
अभी अभी दरवाज़े की घण्टी बजी,
जाके देखा तो सामने इंतज़ार खड़ा था।
बेतहाशा हालत में,बेहाल,बाल बिखरे हुए,
होंठ सूखे,कपड़े बड़ी ही बुरी हालत में,
मैंने पूछा-ये क्या हाल बना रखा है?
उसने बड़ी ही नाराज़गी से जवाब दिया-
जनाब,ये सब आपका किया धरा है।
मैं हो होके थक गया, आप कर करके नहीं थके क्या?
ऐसा कौन है जिसके लिए इतना तड़पते रहते हो?
ऐसा क्या है उसमें कि हर पल करते रहते हो?
उसका और सिर्फ उसका इंतजार।।
मैने हँसकर कहा-ध्यान से सुन,
तेरा वजूद तभी है जब तक किसी से कोई बेपनाह महोब्बत करता रहेगा।।
जिस दिन महोब्बत ख़त्म ,तेरा अस्तित्व भी ख़त्म।।
और इश्क़ में अगर तुझे ना किया तो मज़ा ही कुछ नहीं।।
इंतज़ार ने हँसकर कहा-
जनाब,अति हर चीज़ की बुरी होती है,चाहे फिर वो इंतज़ार ही क्यों ना हो।।
ऐसा ना हो कि करते करते सांस ही थम जाये।
फिर ना मैं रहूंगा,ना इश्क़,ना आप।
बस वो ही रहेगा
जिसका आप करते रहे
आखिरी सांस तक इंतज़ार।।
......….......
मैं चुप था,कोई जवाब नहीं था मेरे पास इंतज़ार की इस बात का,
चुपचाप ही दरवाज़ा बन्द करके मैं लौट आया और मौन रहा काफ़ी देर तक।।
और इंतज़ार,,,,
निकल पड़ा था फिर से भटकने किसी की यादों में उम्मीदों का सहारा लेकर फिर से एक अंजान सफ़र पर, जिनका शायद कोई अंत ना कभी था,
और ना कभी होगा।।
क्योंकि ना इस दुनिया से कभी इश्क़ रुख़सत होगा,
ना ही कभी इंतज़ार ख़त्म होगा।।
रुख़सत होंगे तो बस मैं और आप।।
Wednesday, 10 April 2019
ख़त-रूह से रूह तक - Vikas Relhan Vk
*ख़त-रूह से रूह तक*
*माना कि बहुत व्यस्त हो तुम*
*मग़र हम भी कुछ कम व्यस्त नहीं*
*शायद तुमसे कहीं ज्यादा ही होंगे*
*पर एक बात हमेशा याद रखना*
*समय रहते सम्भाल लो हाथों से रेत की तरह फिसलते रिश्तों को*
*कहीं ऐसा ना हो कि जब तुम्हें फ़ुरसत मिले और तुम हमें ढूँढो तो हम कहीं नज़र ही ना आयें*
*कहीं वक़्त का दरिया बहाकर ना ले जाये रिश्तों की रेत को अपने संग दूर तलक*
*कहीं परिस्थितियों की आँधियाँ छिन्न-भिन्न ना करदें हमारी खुशियों का आशियाना*
*कहीं साँसों की डोर ही न टूट जाये तुम्हारी धड़कनों को सुनने के इंतज़ार में*
*बस इतना ख़्याल रखना*
*जल्दी लौट कर आना*
*तुम्हारे इंतज़ार में-तुम्हारी रूह*
Tuesday, 9 April 2019
मैंने जिया है - Vikas Relhan Vk
*मैंने जिया है अपने ख़्वाबों की सूरत को,*
*मैंने पाया है उसका स्नेह अपार,*
*पाया है उससे सम्मान भी*
*हुआ उसकी एक एक साँस का हक़दार*
*स्वाभिमान बना मैं उसका*
*किया उसने अपने दुलार से सरोबार*
*मंगलसूत्र के रूप में उसने मुझे बांध लिया*
*और मैं बना उसके गले का हार*
*एक दूजे की उंगलियों को सजाया है हमने*
*बनकर अंगूठियों का हार श्रृंगार*
*सातों वचन और रस्में निभाई हैं*
*रखा है अपने एक एक पल से सरोकार*
*प्रेम आलिंगन से तृप्त हुए दोनों*
*ज़मीन से आसमां तक बस प्यार की ही बौछार*
*और वादा किया है साथ चलने का*
*एक दूसरे से ही होंगे सब वार-त्यौहार*
*बस अब इतनी सी तमन्ना है*
*जितनी दफा भी जन्म लूँ इस धरती पर*
*वही हो मेरा हमसफ़र हर बार*
*संग रहें हम जन्मों जनम तक*
*हर बार पहले से हो कहीं ज़्यादा प्यार*
*बेशुमार,बारम्बार, हर बार, बार बार*