अभी अभी दरवाज़े की घण्टी बजी,
जाके देखा तो सामने इंतज़ार खड़ा था।
बेतहाशा हालत में,बेहाल,बाल बिखरे हुए,
होंठ सूखे,कपड़े बड़ी ही बुरी हालत में,
मैंने पूछा-ये क्या हाल बना रखा है?
उसने बड़ी ही नाराज़गी से जवाब दिया-
जनाब,ये सब आपका किया धरा है।
मैं हो होके थक गया, आप कर करके नहीं थके क्या?
ऐसा कौन है जिसके लिए इतना तड़पते रहते हो?
ऐसा क्या है उसमें कि हर पल करते रहते हो?
उसका और सिर्फ उसका इंतजार।।
मैने हँसकर कहा-ध्यान से सुन,
तेरा वजूद तभी है जब तक किसी से कोई बेपनाह महोब्बत करता रहेगा।।
जिस दिन महोब्बत ख़त्म ,तेरा अस्तित्व भी ख़त्म।।
और इश्क़ में अगर तुझे ना किया तो मज़ा ही कुछ नहीं।।
इंतज़ार ने हँसकर कहा-
जनाब,अति हर चीज़ की बुरी होती है,चाहे फिर वो इंतज़ार ही क्यों ना हो।।
ऐसा ना हो कि करते करते सांस ही थम जाये।
फिर ना मैं रहूंगा,ना इश्क़,ना आप।
बस वो ही रहेगा
जिसका आप करते रहे
आखिरी सांस तक इंतज़ार।।
......….......
मैं चुप था,कोई जवाब नहीं था मेरे पास इंतज़ार की इस बात का,
चुपचाप ही दरवाज़ा बन्द करके मैं लौट आया और मौन रहा काफ़ी देर तक।।
और इंतज़ार,,,,
निकल पड़ा था फिर से भटकने किसी की यादों में उम्मीदों का सहारा लेकर फिर से एक अंजान सफ़र पर, जिनका शायद कोई अंत ना कभी था,
और ना कभी होगा।।
क्योंकि ना इस दुनिया से कभी इश्क़ रुख़सत होगा,
ना ही कभी इंतज़ार ख़त्म होगा।।
रुख़सत होंगे तो बस मैं और आप।।
Saturday, 18 May 2019
इश्क़ बनाम इंतज़ार-Vikas Relhan Vk
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