*मैंने जिया है अपने ख़्वाबों की सूरत को,*
*मैंने पाया है उसका स्नेह अपार,*
*पाया है उससे सम्मान भी*
*हुआ उसकी एक एक साँस का हक़दार*
*स्वाभिमान बना मैं उसका*
*किया उसने अपने दुलार से सरोबार*
*मंगलसूत्र के रूप में उसने मुझे बांध लिया*
*और मैं बना उसके गले का हार*
*एक दूजे की उंगलियों को सजाया है हमने*
*बनकर अंगूठियों का हार श्रृंगार*
*सातों वचन और रस्में निभाई हैं*
*रखा है अपने एक एक पल से सरोकार*
*प्रेम आलिंगन से तृप्त हुए दोनों*
*ज़मीन से आसमां तक बस प्यार की ही बौछार*
*और वादा किया है साथ चलने का*
*एक दूसरे से ही होंगे सब वार-त्यौहार*
*बस अब इतनी सी तमन्ना है*
*जितनी दफा भी जन्म लूँ इस धरती पर*
*वही हो मेरा हमसफ़र हर बार*
*संग रहें हम जन्मों जनम तक*
*हर बार पहले से हो कहीं ज़्यादा प्यार*
*बेशुमार,बारम्बार, हर बार, बार बार*
Tuesday, 9 April 2019
मैंने जिया है - Vikas Relhan Vk
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