एक दुनिया वो, जो मुद्दतों से साथ होकर भी अपनी ना हो सकी,
और एक तुम हो , जो मुद्दतों बाद ज़िन्दगी में आई
और हमारी दुनिया ही बन गयी।
एक दुनिया वो , जिसकी वजह हम बने हमसे जुड़ी हर दुनिया से मिलाने में
और वो हमें ही दरकिनार कर,उनसे मिलती चली गई,
और एक तुम हो , जिसने अपनी हर दुनिया से नाता तोड़,हमें ही अपनी दुनिया बना लिया।
एक दुनिया वो, जो झूठ और नफ़रतों का सहारा लेकर सीढ़ियां चढ़ रही है,
और एक तुम हो , जो सच्चाई और प्रेम की मूरत है।
एक दुनिया वो, जो दिखती कुछ और,और दिखाती कुछ और है,
और एक तुम हो , जिसके पास हमें देखने के अलावा कुछ भी नहीं।
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