जहां दिखा ज़्यादा ज़्यादा
वहीं लुढ़क गया प्यादा
भूल गया हर वादा
नहीं रहा नेक इरादा
पर ध्यान रहे
कहीं ज़्यादा ज़्यादा के चक्कर में
हो ना जाये पूरे से आधा
और फिर कहना पड़े हारकर
क्यों किया ज़्यादा ज़्यादा
क्यों रहे हर समय छीनने में ही
क्यों न किया बांटने का इरादा
क्यों ना जिया जीवन सादा
क्यों किया ज़्यादा ज़्यादा
क्यों भूल गए हर वादा
कि अब बचा ही नहीं आधा
काश जिया होता जीवन सादा!!
काश जिया होता जीवन सादा !!!
Wednesday, 31 July 2019
लालच
Saturday, 20 July 2019
कलाकार और उम्र ( Artist & Age ) - by Vikas Relhan Vk
उम्र हर किसी पर अपना शिकंजा कसती है
हर किसी को करके रखती है अपने वश में
हर किसी को अहसास करवाती है पल पल घटती हुई साँसों का और बीते हुए पल का,
पर इस शिकंजे से अगर कोई आज़ाद है तो वो है कलाकार, हाँजी कलाकार!!
क्योंकि
कलाकार की कोई उम्र होती ही नहीं
कलाकार उम्रों का मोहताज हुआ ही नहीं
कलाकार कभी बूढ़ा होता ही नहीं।
अपने मन से, ख़्यालों से, विचारों से,कल्पना से और सृजन से,
वो हमेशा जवान और तरो ताज़ा रहता है,
निराशा में आशा, अविश्वास में विश्वास, असम्भव में सम्भव, असंभावना में सम्भावना, उदासी और ग़म में ख़ुशी, बुराई में भलाई और अच्छाई और नकारात्मकता में सकारात्मकता की रोशनी ढूंढ लेने की क्षमता होती है कलाकार में।
अपनी रचनाओं, अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के माध्यम से,कल्पनाओं के समंदर में गोते लगाता हुआ, वो हर जगह कहीं ना कहीं किसी ना किसी गहराई के कोने में उम्मीद की किरण खोज ही निकालता है।
सही मायने में अगर कहा जाए तो कलाकार गुरु समान है बल्कि गुरु ही कहा जाए तो उचित होगा क्योंकि इस दुनिया और ईश्वर को आपस मे जोड़ने वाली बीच की कड़ी होता है कलाकार।।
हर कला के पुजारी को मेरा कोटि कोटि प्रणाम।।
सभी कलाकारों और कला प्रेमियों को सादर अभिनंदन।।
मेरी ये रचना सभी कलाकारों को समर्पित।।
धन्यवाद,
आपका अपना,
विकास रेल्हान (Vikas Relhan Vk)
Saturday, 13 July 2019
कुदरत क्या और किस्मत क्या?
नयी मंज़िलों की तरफ बढ़ने को
बेताब हैं मेरे कदम
मग़र रास्तों को गवारा नहीं
कि उनके सिवा कोई और
मंज़िलों की दहलीज को छुये।।
आसमाँ छूने को तैयार हैं ये हाथ मेरे
मग़र हवाओं को मंज़ूर नहीं
कि उनके सिवा कोई और
ऊँचाइयों को महसूस करे।।
समंदर की गहराई में
गोते लगाने को तैयार है
ये मन मेरा मग़र
लहरों को बर्दाश्त नहीं
कि उनके सिवा कोई और
पानी की गहराई को समझे।।
जब वजूद ही हाथ छोड़ दे
तो कुदरत क्या और किस्मत क्या???
Thursday, 11 July 2019
बस तू ही !!
शायद कुछ गलतफहमी हुई है
शायद कोई तेरे मेरे दरमियान है
शायद तू नाराज़ है मुझसे
पर वजह मैं नहीं
कोई और है
कह तो दूं हर बात तुझसे
पर तू कभी हक़ तो देके देख
रही बात दुनिया की
तो ध्यान से सुन
मुझे नहीं परवाह किसी की
क्योंकि तू ही मेरी उदासी की शाम
और मेरी खुशियों की भोर है।।
मेरे मन की पीड़ा - Vk
जीवन के इस मोड़ पर
जहां इस वक़्त खड़ा हूँ मैं
इस मनस्थिति के साथ
कि जीना बहुत मुश्किल है
बिन तुम्हारे
पिघल रहा हूँ किसी बर्फ़ की नदी की तरह
और बह रहा हूँ क़तरा क़तरा
उस बंजर ज़मीं पर
जिस पर जितना भी पानी उड़ेल दो
मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है
उगना उम्मीदों की फ़सल का
जल रहा हूँ उस ज्वालामुखी की तरह
जिसे ना कोई चिंगारी दिखाता है
और ना ही कोई मजबूर करता है
उगलने के लिए लावा
बस वो जलता है अपने ही अंदर के ऊष्म मंथन से
भड़कता है अपने ही अंदर की आग से
लपटें उठाता है अपनी ही गर्मी से
और जला डालता है अपने साथ साथ
हर सामने आने वाली
दुनियावी चीज़ों को भी
इस दुनिया में कोई भी
इस बात के लिए नहीं होगा राज़ी
कि किसी की भी वजह से
मैं पिघलता रहा
और जलता रहा
क्योंकि हर कोई मशगूल है
अपनी अपनी दुनिया को सजाने में
हर कोई है व्यस्त
अपनी अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में
क्यों लेगा ऐसे में कोई
मेरी तक़लीफ़ों की ज़िम्मेदारी
बस अब थकने सा लगा हूँ
धैर्य साथ छोड़ने लगा है
सब्र गिरने सा लगा है शायद
सम्भलना चाहता हूँ
जीना चाहता हूँ
खुश रहना चाहता हूँ
काश!!! कि कोई उम्रदराज़ आकर
दे दे मुझे अनुभव अपना
कि क्या होता है इसके बाद?
कौनसा होगा अगला पड़ाव?
कैसी होगी मन की स्थिति?
और कितना हो जाएगा परिपक्व मन?
जब ये सब होता है महसूस
ज़िन्दगी के सफ़र में
क्योंकि उनसे बेहतर कौन जानेगा?
उनसे बेहतर कौन समझेगा?
मेरे मन की पीड़ा!!!
मेरे मन की पीड़ा!!!
काश!!!!!
Wednesday, 10 July 2019
पहली दफा !!!
पहली दफ़ा!!!
पहली दफ़ा तेरी बात पर यकीं सा नहीं हो रहा
पहली दफ़ा तू लगा कुछ बदला बदला सा है
पहली दफ़ा अंदर तक हिल गया मैं
पहली दफ़ा साँस हलक में अटका अटका सा है
पहली दफ़ा बहुत ही ज़्यादा डर सा गया हूँ
पहली दफ़ा दिल सहमा सहमा सा है
पहली दफ़ा तुझे ग़ैर मौजूद पाया है अपनी ज़िन्दगी में
पहली दफ़ा मेरा जहां सूना सूना सा है
पहली दफ़ा ठेस पहुंची है मेरी इबादतों को
और तू कहता है कि ये सब बेमतलब सा है?
तुम्हारा होना !!!
तुम्हारा होना!!!
तपती गर्मी की चिलचिलाती धूप में भी भीगा भीगा सा रहता हूँ, मैं सावन सावन सा झूमता हूँ,
जब तू हवा भर सा भी छू जाता है मुझे एहसासों में
तुम्हारा ना होना!!!
धड़कते हुए बादलों की मस्तियों में बहने वाली तेज़ मूसलाधार बारिश भी चुभती है,
छील के रख देती है जिस्म मेरा,
लहूलुहान कर डालती है उसमें बसे तेरे मेरे लम्हों को,
जब तू पल भर के लिए भी अलग कर लेता है खुद को मेरे ख़यालों से।।।