मेरे मन !! ज़रा ध्यान से सुन !!!
मत कर कोशिशें ख़ुश रहने की
तैयार कर स्वयं को सुख के ही सफ़र में
आने वाले दुख का सामना करने के लिए बेबाक होकर,
हर ख़ुशी को समझ ख़ुश हवाओं का सानिध्य,
और हर दुःख को समझ
आने वाली ख़ुशियों से पहले का मात्र एक पल,
मत कर कोशिशें समय को बांधने की,
क्योंकि जिसने समय को बांधना चाहा,
समय ने उसे ही हालात में जकड़ डाला,
खुल कर जी हर लम्हा,उत्सव मना ज़िन्दगी का
और डूब जा जीवंत क्रीड़ाओं के जश्न में,
मत ढूंढ कोई भी वजह जीने की
के तेरे जीने की वजह ख़ुद तेरे अरमान हैं,
पलकें झुका, बंद कर आँखें, ज़रा सा दिल के पास ला,
जिसे तू ढूँढे, वो तो तेरे हृदय में ही विराजमान है।।
मेरे मन !! ज़रा ध्यान से सुन !!!
Wednesday, 10 July 2019
मेरे मन !! ज़रा ध्यान से सुन !!!
दिल और दिमाग
क्या कभी इस पर ग़ौर फ़रमाया ???
दिल और दिमाग
दोनों का काम करने का तरीक़ा
बिल्कुल एक दूजे से अलग
दिमाग से सोचा जा सकता है,
और दिल हमेशा चाहता है,
ना जाने कितनी बार सोचा है जब कुछ करने को
तो वो भी नहीं हुआ जो होना चाहिए था,
पर जब जब चाहा है पूरी शिद्दत और मन्नत से कुछ भी,
तो असम्भव को भी सम्भव होते हुए देखा है।
बस फिर सोचना क्या?
चाहते हैं ना जी जान से !! जो भी चाहिये !!
Friday, 28 June 2019
यूँ ही ना वक़्त ज़ाया करो - Vikas Relhan Vk
यूँ ही ना वक़्त ज़ाया करो
जहां क़द्र हो आपके एहसास की
बस वहीं दिल की बात सुनाया करो
हमसफ़र बनना कोई खाला जी का खेल नहीं
यूँ ही ना हर किसी से उम्मीद लगाया करो
मन्नत और मिन्नत वहीं करो
जहां पूरी होने की आस हो
यूँ ही किसी भी ग़ैर के लिये
रास्तों पर आंखें न गढाया करो
जो चले सिर्फ़ तुमसे ही मिलने के लिए
बस उसी के लिये नज़रें बिछाया करो
वो बैठा रहे चाहे मुँह फुलाकर दिन महीने और साल
तुम तो अच्छे इंसान हो,उसका हाल चाल ही पूछ आया करो
जितने भी हैं दगाबाज़ और मतलबपरस्त आसपास
अपने दिलो दिमाग से उनका सफाया करो
हर कोई मशगूल है अपना उल्लू सीधा करने में
तुम भी बस अपने काम में दिल लगाया करो
सब मतलब के यार हैं और हैं एहसान फ़रामोश
हर किसी को ना नेकी का पाठ पढ़ाया करो
बिकाऊ है दिल का बाज़ार और बोली लगती है ख़्वाबों की
तुम भी कभी कभी कुछ सपने बेच आया करो
हाथ न फैलाना पड़े किसी ग़रीब के भी आगे
कम से कम इतना तो रोज़ कमाया करो
कि मंज़िल तेरी राह तक रही है हर पल
इन्तज़ार में किसी के ना वक़्त गंवाया करो
जो दे दे सारे हक़ अपने दिल,जिस्म,जान और रूह के भी तुम्हें
उसके लिये तो जान पर भी खेल जाया करो
उसके लिये तो जान पर भी खेल जाया करो।।
Tuesday, 25 June 2019
गुरु और शिष्य
जिन्हें अपने पास बिठाकर एक एक सुर की समझ और गायकी दी हो,
हर वो चीज़ ,हर वो मंत्र सिखाया हो जो हमें हमारे गुरुजनों ने बड़े ही स्नेह और वात्सल्य से सिखाया,
जब वही शिष्य साथ खड़े होकर गाने लगें तो मन और आत्मा ख़ुशी से झूम उठते हैं,
बार बार दुआयें और आशीर्वाद बरसता है उनके लिए हृदय से,
और सर श्रद्धा से झुक जाता है अपने परमात्मा, अपने माता पिता और अपने गुरुजनों के प्रति,
जिन्होंने हमें इस काबिल बना दिया कि हम पीढ़ी दर पीढ़ी संगीत की सेवा करते जायें।।
गुरुजनों को कोटि कोटि नमन।।
संगीत को आगे सही दिशा में बढ़ाने वाले शिष्यों को प्यार और आशीर्वाद।।।
Vikas Relhan Vk
Thursday, 20 June 2019
Duniya aur tum | दुनिया और तुम | Vikas Relhan Vk
एक दुनिया वो, जो मुद्दतों से साथ होकर भी अपनी ना हो सकी,
और एक तुम हो , जो मुद्दतों बाद ज़िन्दगी में आई
और हमारी दुनिया ही बन गयी।
एक दुनिया वो , जिसकी वजह हम बने हमसे जुड़ी हर दुनिया से मिलाने में
और वो हमें ही दरकिनार कर,उनसे मिलती चली गई,
और एक तुम हो , जिसने अपनी हर दुनिया से नाता तोड़,हमें ही अपनी दुनिया बना लिया।
एक दुनिया वो, जो झूठ और नफ़रतों का सहारा लेकर सीढ़ियां चढ़ रही है,
और एक तुम हो , जो सच्चाई और प्रेम की मूरत है।
एक दुनिया वो, जो दिखती कुछ और,और दिखाती कुछ और है,
और एक तुम हो , जिसके पास हमें देखने के अलावा कुछ भी नहीं।
Wednesday, 19 June 2019
झरना - Vikas Relhan Vk
झरना
ये झरना कितना अजीब है
हर वक़्त रहता है बहने को तैयार
दौड़ता है हर पल बाहर की ओर
और करता हैं कोशिशें बिखर जाने की
उकसाता है कि टूट जाऊँ मैं
बिखर ही जाऊँ
लहरों सा इसका उछाल
उमड़ता है बार बार
झिंझोड़े सौ दफ़ा
हिलाये हज़ारों बार
मेरे दिल की हर दीवार
समझाऊं लाखों दफ़ा
नहीं मानने को तैयार
मगर
रोक के रखा है इसे
यही आस बस इक दिल मे लिये
कि जिस दिन भी तू मुझसे मिले
बहा दूंगा मैं ये झरना
तुमसे लगके गले
सम्भाल के रखा है इक इक कतरा इस झरने का
कहीं बह न जाएं मेरे जज़्बात भी
इन आँखों के झरने के साथ ही
ये झरना है मेरे आँसुओं का
जो बहता है बस तेरे लिए
चाहे हो ख़ुशी, या ग़म।।
Vikas Relhan Vk
Saturday, 18 May 2019
इश्क़ बनाम इंतज़ार-Vikas Relhan Vk
अभी अभी दरवाज़े की घण्टी बजी,
जाके देखा तो सामने इंतज़ार खड़ा था।
बेतहाशा हालत में,बेहाल,बाल बिखरे हुए,
होंठ सूखे,कपड़े बड़ी ही बुरी हालत में,
मैंने पूछा-ये क्या हाल बना रखा है?
उसने बड़ी ही नाराज़गी से जवाब दिया-
जनाब,ये सब आपका किया धरा है।
मैं हो होके थक गया, आप कर करके नहीं थके क्या?
ऐसा कौन है जिसके लिए इतना तड़पते रहते हो?
ऐसा क्या है उसमें कि हर पल करते रहते हो?
उसका और सिर्फ उसका इंतजार।।
मैने हँसकर कहा-ध्यान से सुन,
तेरा वजूद तभी है जब तक किसी से कोई बेपनाह महोब्बत करता रहेगा।।
जिस दिन महोब्बत ख़त्म ,तेरा अस्तित्व भी ख़त्म।।
और इश्क़ में अगर तुझे ना किया तो मज़ा ही कुछ नहीं।।
इंतज़ार ने हँसकर कहा-
जनाब,अति हर चीज़ की बुरी होती है,चाहे फिर वो इंतज़ार ही क्यों ना हो।।
ऐसा ना हो कि करते करते सांस ही थम जाये।
फिर ना मैं रहूंगा,ना इश्क़,ना आप।
बस वो ही रहेगा
जिसका आप करते रहे
आखिरी सांस तक इंतज़ार।।
......….......
मैं चुप था,कोई जवाब नहीं था मेरे पास इंतज़ार की इस बात का,
चुपचाप ही दरवाज़ा बन्द करके मैं लौट आया और मौन रहा काफ़ी देर तक।।
और इंतज़ार,,,,
निकल पड़ा था फिर से भटकने किसी की यादों में उम्मीदों का सहारा लेकर फिर से एक अंजान सफ़र पर, जिनका शायद कोई अंत ना कभी था,
और ना कभी होगा।।
क्योंकि ना इस दुनिया से कभी इश्क़ रुख़सत होगा,
ना ही कभी इंतज़ार ख़त्म होगा।।
रुख़सत होंगे तो बस मैं और आप।।