*ना जाने कितनी ही बार तुझसे नाराज़ हो कर निकल गया मैं कितनी ही दूर ख्यालों ख्यालों में*
*बहुत बहुत दूर कई कई बार*
*ना जाने कितनी ही बार*
*मग़र घूम कर तुझ तक ही आ पहुंचा मैं हर बार*
*और पाया तुझे वहीं खड़े खड़े करते हुए मेरा इंतज़ार*
*लौटा मैं इक एहसास लिए हुए,एक पश्चाताप के साथ हर बार*
*कि घड़ी की दोनों सुईयों की मानिंद है अपना प्यार*
*रूठेगा भी,छूटेगा भी,टूटेगा भी,पर फिर से वहीं पर वैसा ही मिलन होगा दोनों का बार बार*
*इसी एहसास के साथ कि हम दोनों से ही है इक दूजे का वजूद*
*ना मेरे बिन तेरा पार*
*ना तेरे बिन मेरा पार*
*यही है प्यार,यही है प्यार*
*यही तो है प्यार*
Wednesday, 3 April 2019
Yahi to Hai Pyaar - Vikas Relhan Vk
Wednesday, 26 September 2018
मन की दशा
समझ सकता हूँ मैं तेरे मन की दशा
महसूस कर सकता हूँ तेरे अंदर की उथल पुथल
छू सकता हूँ तेरे संग बीते उन सब लम्हों को
बह रहा हूँ तेरे भावों के बहते सागर में
क्योंकि
जो तुझे अब महसूस हुआ है
मैं वो मंज़र सदियों से जी रहा हूँ
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माँ का चेहरा
जब कभी जीवन में
हताश और निराश होने लगो,
तो बस आंख बंद करो
और अपनी माँ का चेहरा देखो,
और याद करो
उनका हमारे लिए
त्याग,
बलिदान,
हमारे लिए सबसे लड़ना,
अपनी खुशियों
और अरमानों को दबा देना,
सिर्फ हमारे लिये।।
सिर्फ़ यही सोचकर
कि हम एक दिन
उनका सर गर्व से ऊंचा कर देंगे।।
और फिर आंख खोलो,
यकीनन
आप बहुत अच्छा
और
तरोताज़ा महसूस करेंगे,
और लग जाएंगे
उनके
सपनों को पूरा
करने में।।।
बदलाव (Demaand) by Vikas Relhan Vk
जो आसानी से मिले और पास भी हो,
आपकी भी हो,
उसे छोड़कर उन चीज़ों के लिए भागना
जो मिलना भी मुश्किल,
कहीं न कहीं नामुमकिन भी।।
क्यों न खुद को ज़रा सँवारा जाये,
जो रखें हर पल ख़्याल
उन्ही के ख़यालों में वक़्त गुज़ारा जाये
ज़िन्दगी मांगे फिर से बदलाव
क्यों न ज़िन्दगी को फिर से निखारा जाये।।
ऐ दिले नादाँ by Vikas Relhan Vk
ऐ दिले नादाँ
क्यूँ रखे उनकी आस
जिनकी ख़ुद की कोई आस नहीं
क्यूँ भटके उनके लिए प्यासा
जिन्हें तेरी ज़रा भी प्यास नहीं
क्यूँ है तुझे इंतज़ार उनका
जिन्हें वक़्त पर विश्वास नहीं
इश्क़ अगर करना है
तो ख़ुद से करके देख
देख लेना न रहेगी
इच्छा किसी भी चाह की
जीने लगेगा बेपरवाह
न होगी परवाह, परवाह की
न होगा डर ख़ुद से जुदा होने का
ना होगी कोई मंशा किसी भी बंधन की
न होगी महसूस ज़रूरत कभी भी संगम की
क्योंकि तू तो खुद में ही है समाया
ज़रा इश्क़ कर ख़ुद से ही तू
बन जा ज़रा अपना सरमाया
अब जीले अपने ही आगोश में
क्योंकि ख़ुद से इश्क़ ही तो ख़ुदा से इश्क़ है
ऐ दिले नादाँ ।।।
Monday, 17 September 2018
'इच्छा' by Vikas Relhan Vk
बहुत कोशिश की
कि तेरे लिए कुछ गा सकूं
पर वो सुर कहाँ से लाऊं
जिससे तुझे रिझा सकूं
तेरी ग़ैरमौजूदगी बदत्तर है मौत से भी
तेरा होना, दे दिल को सुकूँ
बस यही दुआ है मेरी रब से
कि हर सांस में तुझे पा सकूं
हर ग़ज़ल में तेरा नाम हो
हर नज़्म में तुझे गुनगुना सकूं
हर तान हो तेरी
धड़कन के साज़ पर
हर जन्म में तेरा साथ निभा सकूं।।
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Wednesday, 12 September 2018
बेटियाँ
जिन्हें देखकर
महसूस हो तुम्हारा वजूद,
ऐसा हमसाया होती हैं
बेटियाँ ।।
ऐसी परछाईयाँ
जो धूप के साथ-साथ
छाँव में भी साथ-साथ चलती हैं ।।