Wednesday, 3 April 2019

Yahi to Hai Pyaar - Vikas Relhan Vk

*ना जाने कितनी ही बार तुझसे नाराज़ हो कर निकल गया मैं कितनी ही दूर ख्यालों ख्यालों में*
*बहुत बहुत दूर कई कई बार*
*ना जाने कितनी ही बार*
*मग़र घूम कर तुझ तक ही आ पहुंचा मैं हर बार*
*और पाया तुझे वहीं खड़े खड़े करते हुए मेरा इंतज़ार*
*लौटा मैं इक एहसास लिए हुए,एक पश्चाताप के साथ हर बार*
*कि घड़ी की दोनों सुईयों की मानिंद है अपना प्यार*
*रूठेगा भी,छूटेगा भी,टूटेगा भी,पर फिर से वहीं पर वैसा ही मिलन होगा दोनों का बार बार*
*इसी एहसास के साथ कि हम दोनों से ही है इक दूजे का वजूद*
*ना मेरे बिन तेरा पार*
*ना तेरे बिन मेरा पार*
*यही है प्यार,यही है प्यार*
*यही तो है प्यार*

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